Sunday, 26 June 2016

आप क्या सोचते हो -१

फ्रेंड्स,
आज मे मेरे जीवन की कुछ सामान्य पर मेरे जीवन को बदलने वाली  बातो को आपके सामने रखता हूँ !

आज हम इस दुनिया मे अलग अलग प्रकार  के लोग देखते है!
हर एक का रेहेंन सेहेण  ढ़ंग  अलग होता है
सब अपने अच्छे  बुरे विचारो मे जीते  है !
     पर अगर  हम किसीसे  सवाल  करे की;
(मनुष्य प्राणी  अस्तित्व  मे कैसे आया)

तो इसका  जवाब कोई नही दे सकता !
           

विज्ञान कहता  है की
कई वर्षों  पूर्व एक बिंदु था
जिसक विस्फोट  होने की वजह से ये आकाशगंगा  अस्तित्व मे आयी
जिसके परिणाम स्वरूप सूर्य, पॄथ्वी और अन्य ग्रह अस्तित्व मे आये
और उसके बाद
पॄथ्वी पर लगतार  बारीश  होने की आगे बढ़ती चले reactions की वजह से मानव जाती अस्तित्व मे आयी
             और दूसरी तरफ़ हर धर्म अपनी अलग अलग मान्यतायें बताते है !
       धर्म के हीसाब  से कहो,
दिन (फाल्गुन कृष्णपक्ष चतुर्दशी) स्रष्टी उत्पति हुई । कुछ वर्षों पश्चात इसी तिथि को महादेव और भगवती पार्वती  का विवाह हुआ ।

प्रार्थना है
हमारे महादेव और भगवती पार्वती  इस युग में आप हमारा मार्गदर्शन करें ।

वेद इस संसार के प्राचीनतम ग्रन्थ तथा ज्ञान के स्रोत्र है

इसमें कोई संदेह नही।

अब वेदों में ब्रह्माण्ड की उत्पति की जो व्याख्या है वो,

(नासदीय सूक्त) ऋग्वेद के 10 वें मंडल मे है . इसका सम्बन्ध ब्रह्माण्ड विज्ञान और ब्रह्मांड की उत्पत्ति के साथ है।
माना जाता है की यह सूक्त ब्रह्माण्ड के निर्माण के बारे में काफी सटीक तथ्य बताता है!

धर्म के हिसाब  से

भगवनने ही
मानव को अच्छे बुरे गुण प्रधान किये है, उसीने  ईस सृष्टि  को जन्म दिया है और हमारा रक्षण भी वोहि  करते  है  
       अगर हम कोई बुरा कर्म करे तो उसकी शिक्षा भी हमे भगवन ही देते है
ऐसे ही अगर आदमी अच्छॆ कर्म करता है तो वो स्वर्ग मे जाता है
और बुर कर्म करे तो नरक मे  येही commonly देखो तो सर्व धर्म की मान्यतायें होती है,
             यहाँ पे मुझे और आपको भी ये सवाल आता होगा की,

अगर भगवानने खुद हमे ये स्वभाव गुण दिये है तो उसी बात  की हमे सजा क्यों?????

लोग कहते है की,
आदमी को उसके पिछले जन्म  के बुरे कर्मों की सजाए  मिलती  है

क्या आप खुद बता सकते हो की,

आपका पिछला  जन्म कौनसा था?????

शायद नही.....

चलिये ईस बात को एग्ज़ेंपल मे समजतें है,

हम सब भगवान को माता-पिता के रूप  मे देखते  है,
जिस प्रकार माता-पिता अपने बच्चे को गलती की सजाए देते है उसी प्रकार भगवान भी हमे सजाए  देते है

        आगे मै जो सवाल करने जा रहा हूँ, शायद आपको भी ये सवाल आया होगा

अगर  हम गौर करे तो,
पता चलता है की,
हमारे माता-पिता की सोच होती है की अगर  हम बच्चे को उसके गलती की सजा दे तो वो फ़िर से यह गलती नही दोहरायें गा
उसको ईस बात का एहसास होगा की हमे गलती से सजा मिलती है
और बच्चे भी यही सोचते है की अगर हम गलती दोहरायेंगे  तो हमे सज़ा  मिल सकती है,

ये ही बात भगवान के बारे मे भी यही है
वो हमे हमाँरी कर्म की सजा नरक मे देते है,

यहा तक तो ठीक है,

लेकीन ये इंसान फ़िर से इसी संसार मे आंता  है
वो भूल जाता है की मेरा पिछला जन्म कौनसा था?

और वह फ़िर से उसकी समज से बाहर उन्ही गलतियों को दोहराने लगता है
जब की उन्ही बातो के लिये उसने कभी सजाए भी भोगी है,

यहाँ पे ये सवाल आता है की,

अगर  भगवान को सच मे लोगो ने
किये हुए बात का क्रोध आता है तो
वो इंसान को किये गलती की
पल पल याद क्यों नही दिलाती

चाहे वो ईस जन्म की हो या उसके पिछले जन्म की?????

इस सवाल के जवाब आपके पास है

          ..............नही

मेरे पास है

JUST WAIT
FOR NEXT PART
 
आप क्या सोचते हो -२


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